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mahabharat 13.81.10: जो मनुष्य दूध देने वाली, उत्तम वर्ण वाली चित्तीदार गाय को वस्त्र से ढककर, चित्तीदार बछड़े सहित दान करता है, वह चन्द्रलोक में पूजित होता है॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 13.81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 81: गौओंको तपस्याद्वारा अभीष्ट वरकी प्राप्ति तथा उनके दानकी महिमा, विभिन्न प्रकारके गौओंके दानसे विभिन्न उत्तम लोकोंमें गमनका कथन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.81.10 
समानवत्सां शबलां धेनुं दत्त्वा पयस्विनीम्।
सुव्रतां वस्त्रसंवीतां सोमलोके महीयते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दूध देने वाली, उत्तम वर्ण वाली चित्तीदार गाय को वस्त्र से ढककर, चित्तीदार बछड़े सहित दान करता है, वह चन्द्रलोक में पूजित होता है॥ 10॥
 
He who donates a milk-giving, well-characterized spotted cow, after covering it with clothes, along with a spotted calf, is worshipped in the Moon-loka.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)