श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.80.9 
सायं प्रातश्च सततं होमकाले महाद्युते।
गावो ददति वै हौम्यमृषिभ्य: पुरुषर्षभ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! प्रातः और सायंकाल होम के समय सदैव गौएँ ही ऋषियों को हवन सामग्री (घी आदि) अर्पित करती हैं॥9॥
 
O mighty man! In the morning and evening, at the time of homa, it is always the cows who offer the sacrificial materials (ghee etc.) to the sages.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)