श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.80.8 
गावो यज्ञस्य हि फलं गोषु यज्ञा: प्रतिष्ठिता:।
गावो भविष्यं भूतं च गोषु यज्ञा: प्रतिष्ठिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
गौएँ यज्ञों का फल देने वाली हैं। यज्ञ उनमें प्रतिष्ठित हैं। गौएँ भूत और भविष्य हैं। यज्ञ उनमें प्रतिष्ठित हैं, अर्थात् यज्ञ गौओं पर आश्रित हैं।॥8॥
 
‘Cows are the ones who give the fruits of sacrifices. The sacrifices are established in them. Cows are the past and the future. The sacrifices are established in them, i.e. the sacrifices are dependent on cows.॥ 8॥
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