श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.80.3 
सौदास उवाच
त्रैलोक्ये भगवन् किंस्वित् पवित्रं कथ्यतेऽनघ।
यत् कीर्तयन् सदा मर्त्य: प्राप्नुयात् पुण्यमुत्तमम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सौदास बोले - हे प्रभु! हे निष्पाप महर्षि! तीनों लोकों में ऐसा कौन-सा पवित्र कहा गया है, जिसका नाम मात्र लेने से ही मनुष्य उत्तम पुण्य प्राप्त कर लेता है?
 
Saudas said – Lord! Sinless Maharishi! Which among the three worlds is said to be such a sacred thing, whose name alone can make a person attain the best virtue? 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)