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श्लोक 13.80.24  |
गा वै पश्याम्यहं नित्यं गाव: पश्यन्तु मां सदा।
गावोऽस्माकं वयं तासां यतो गावस्ततो वयम्॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| मैं सदैव गायों के दर्शन करता रहूँ और गायें मुझ पर कृपा करती रहें। गायें हमारी हैं और हम गायों के हैं। जहाँ गायें रहेंगी, हम भी वहीं रहेंगे॥ 24॥ |
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| ‘May I always see the cows and may the cows shower their blessings on me. The cows are ours and we belong to the cows. Wherever the cows live, we will live there.॥ 24॥ |
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