| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 13.80.23  | गावो मामुपतिष्ठन्तु हेमशृङ्गॺ: पयोमुच:।
सुरभ्य: सौरभेय्यश्च सरित: सागरं यथा॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे नदियाँ समुद्र की ओर बहती हैं, वैसे ही दूध देने वाली सुरभि और सौरभेयी गौएँ, जिनके सींग सोने से मढ़े हुए हैं, मेरे पास आएँ॥ 23॥ | | | | ‘Just as rivers flow towards the ocean, may the milk-giving cows, Surabhi and Saurbheyi, with horns plated with gold, come near me.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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