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श्लोक 13.80.20  |
सार्द्रे चर्मणि भुञ्जीत निरीक्षेद् वारुणीं दिशम्।
वाग्यत: सर्पिषा भूमौ गवां पुष्टिं सदाश्नुते॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| गीली गौ-चर्म पर बैठकर भोजन करो। पश्चिम की ओर मुख करके भूमि पर मौन बैठकर घी खाओ। इससे गौओं की वृद्धि और स्वास्थ्य सदैव बना रहता है।॥20॥ |
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| ‘Eat while sitting on wet cow skin. Face the west and eat ghee while sitting on the ground in silence. This always helps in the growth and health of cows.॥ 20॥ |
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