श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.80.17 
गवां मूत्रपुरीषस्य नोद्विजेत कथंचन।
न चासां मांसमश्नीयाद् गवां पुष्टिं तथाप्नुयात्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
गायों के मूत्र और गोबर से व्याकुल न हो, उनसे घृणा न करे और उनका मांस न खाए। इससे मनुष्य को पुष्टि मिलती है ॥17॥
 
Don't be disturbed by the urine and dung of cows, don't hate them and don't eat their meat. Man gets confirmation from this. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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