Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.80.12: जो सौ गौओं का स्वामी है, परन्तु अग्निहोत्र नहीं करता, जो हजार गौओं का स्वामी है, परन्तु यज्ञ नहीं करता तथा जो धनवान है, परन्तु कृपणता नहीं छोड़ता - ये तीन व्यक्ति अर्घ्य (सम्मान) पाने के अधिकारी नहीं हैं॥12॥ | mahabharat अध्याय 13.80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनाहिताग्नि: शतगुरयज्वा च सहस्रगु:।
समृद्धो यश्च कीनाशो नार्घ्यमर्हन्ति ते त्रय:॥ १२॥
अनुवाद
जो सौ गौओं का स्वामी है, परन्तु अग्निहोत्र नहीं करता, जो हजार गौओं का स्वामी है, परन्तु यज्ञ नहीं करता तथा जो धनवान है, परन्तु कृपणता नहीं छोड़ता - ये तीन व्यक्ति अर्घ्य (सम्मान) पाने के अधिकारी नहीं हैं॥12॥
One who owns a hundred cows but does not perform Agnihotra, one who owns a thousand cows but does not perform Yagna and one who is rich but does not give up miserliness - these three persons are not entitled to receive Arghya (respect).॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥