श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 80: वसिष्ठका सौदासको गोदानकी विधि एवं महिमा बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.80.10 
यानि कानि च दुर्गाणि दुष्कृतानि कृतानि च।
तरन्ति चैव पाप्मानं धेनुं ये ददति प्रभो॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जो मनुष्य नव-प्रसूत गाय का दान करते हैं, वे सब कठिन संकटों से, अपने कर्मों के पाप कर्मों से तथा समस्त पापों से बच जाते हैं॥ 10॥
 
O Lord! Those who make donations of a newly-delivered lactating cow, are saved from all the difficult difficulties that may befall them, the evil deeds of their own actions and also from all the sins.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)