Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.8.27: क्रोधरहित और क्षमाशील ब्राह्मण को पाकर क्षत्रिय का अधिक प्रयोग किया हुआ तप और तेज आग में जलती हुई रुई के ढेर के समान तत्काल नष्ट हो जाता है। यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर तेज और तप का प्रयोग करें, तो वे पूर्णतः नष्ट नहीं होते; किन्तु यदि क्षमाशील ब्राह्मण द्वारा नष्ट न किया गया क्षत्रिय का तेज किसी तेजस्वी ब्राह्मण पर प्रयोग किया जाए, तो वह उसके द्वारा विकर्षित होकर पूर्णतः नष्ट हो जाता है, तनिक भी शेष नहीं रहता।॥27॥ | mahabharat अध्याय 13.8: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्रोधरहित और क्षमाशील ब्राह्मण को पाकर क्षत्रिय का अधिक प्रयोग किया हुआ तप और तेज आग में जलती हुई रुई के ढेर के समान तत्काल नष्ट हो जाता है। यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर तेज और तप का प्रयोग करें, तो वे पूर्णतः नष्ट नहीं होते; किन्तु यदि क्षमाशील ब्राह्मण द्वारा नष्ट न किया गया क्षत्रिय का तेज किसी तेजस्वी ब्राह्मण पर प्रयोग किया जाए, तो वह उसके द्वारा विकर्षित होकर पूर्णतः नष्ट हो जाता है, तनिक भी शेष नहीं रहता।॥27॥
On finding a Brahmin who is free from anger and forgiving, the penance and brilliance used in excess by a Kshatriya are instantly destroyed like a heap of cotton on fire. If the brilliance and penance are used by both sides on each other, then they are not completely destroyed; but if the brilliance of a Kshatriya which has not been destroyed by a forgiving Brahmin is used on a brilliant Brahmin, then it is repelled by him and completely destroyed, not even a little bit remains.॥27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥