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mahabharat 13.8.20: युधिष्ठिर! जैसे स्त्रियों के लिए अपने पति की सेवा करना संसार का सबसे बड़ा धर्म है, उनके पति ही उनके ईश्वर हैं और वही उनका परम लक्ष्य है, उनके लिए कोई अन्य लक्ष्य नहीं है; वैसे ही क्षत्रिय के लिए ब्राह्मण की सेवा करना परम धर्म है। ब्राह्मण ही उनके ईश्वर हैं और वही उनका परम लक्ष्य हैं, उनके लिए कोई अन्य लक्ष्य नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 13.8: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 8: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी महिमा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.8.20 
यथा भर्त्राश्रयो धर्म: स्त्रीणां लोके युधिष्ठिर।
स देव: सा गतिर्नान्या क्षत्रियस्य तथा द्विजा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जैसे स्त्रियों के लिए अपने पति की सेवा करना संसार का सबसे बड़ा धर्म है, उनके पति ही उनके ईश्वर हैं और वही उनका परम लक्ष्य है, उनके लिए कोई अन्य लक्ष्य नहीं है; वैसे ही क्षत्रिय के लिए ब्राह्मण की सेवा करना परम धर्म है। ब्राह्मण ही उनके ईश्वर हैं और वही उनका परम लक्ष्य हैं, उनके लिए कोई अन्य लक्ष्य नहीं है।
 
Yudhishthira! Just as for women, serving their husbands is the biggest religion in the world, their husbands are their god and he is their ultimate goal, there is no other goal for them; similarly for a Kshatriya, serving a Brahmin is the ultimate religion. Brahmins are their god and their ultimate goal, there is no other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)