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mahabharat 13.79.32: जो मनुष्य गौओं की उत्पत्ति से संबंधित इस उत्तम कथा का नियमित पाठ करता है, वह अपवित्र होने पर भी शुभ फल प्राप्त करता है और कलियुग के समस्त दोषों से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, उसे सदैव पुत्र, लक्ष्मी, धन और पशु आदि की प्राप्ति होती है॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 13.79: कपिला गौओंकी उत्पत्ति और महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 79: कपिला गौओंकी उत्पत्ति और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.79.32 
इदं गवां प्रभवविधानमुत्तमं
पठन् सदाशुचिरपि मंगलप्रिय:।
विमुच्यते कलिकलुषेण मानव:
श्रियं सुतान् धनपशुमाप्नुयात् सदा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य गौओं की उत्पत्ति से संबंधित इस उत्तम कथा का नियमित पाठ करता है, वह अपवित्र होने पर भी शुभ फल प्राप्त करता है और कलियुग के समस्त दोषों से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, उसे सदैव पुत्र, लक्ष्मी, धन और पशु आदि की प्राप्ति होती है॥ 32॥
 
A person who regularly recites this excellent story related to the origin of cows, even if he is impure, becomes auspicious and is freed from all the evils of Kaliyug. Not only this, he always gets sons, Lakshmi, wealth and animals etc.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)