श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 79: कपिला गौओंकी उत्पत्ति और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  13.79.22-23 
यास्तु तस्मादपक्रम्य सोममेवाभिसंश्रिता:॥ २२॥
यथोत्पन्ना: स्ववर्णास्थास्ता ह्येता नान्यवर्णगा:।
अथ कुद्धं महादेवं प्रजापतिरभाषत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जो गौएँ वहाँ से भागकर चन्द्रमा की शरण में गईं, वे ज्यों की त्यों रहीं। उनका रंग नहीं बदला। उस समय दक्ष प्रजापति ने क्रोध में भरे हुए महादेव जी से कहा-॥22-23॥
 
But the cows which fled from there and took refuge in the moon remained the same as they were born. Their colour did not change. At that time Daksha Prajapati said to Mahadev Ji who was filled with anger -॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)