श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 79: कपिला गौओंकी उत्पत्ति और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.79.12 
यथा ह्यमृतमाश्रित्य वर्तयन्ति दिवौकस:।
तथा वृत्तिं समाश्रित्य वर्तयन्ति प्रजा विभो॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जैसे देवता अमृत का आश्रय लेकर जीवित रहते हैं, वैसे ही सब मनुष्य जीविका का आश्रय लेकर जीवित रहते हैं॥12॥
 
O Lord! Just as the gods survive by taking shelter of nectar, similarly all human beings survive by taking shelter of livelihood. ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)