Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.78.29: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब भीष्मजी ने इस प्रकार यज्ञ करने का आदेश दिया, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने वैसा ही किया और देवों के देव बृहस्पतिजी ने मान्धाता के लिए जो उत्तम धर्म का उपदेश किया था, उसे भी भली-भाँति स्मरण किया॥29॥ | mahabharat अध्याय 13.78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
तथा सर्वं कृतवान् धर्मराजो
भीष्मेणोक्तो विधिवद् गोप्रदाने।
स मान्धातुर्देवदेवोपदिष्टं
सम्यग्धर्मं धारयामास राजा॥ २९॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! जब भीष्मजी ने इस प्रकार यज्ञ करने का आदेश दिया, तब धर्मराज युधिष्ठिर ने वैसा ही किया और देवों के देव बृहस्पतिजी ने मान्धाता के लिए जो उत्तम धर्म का उपदेश किया था, उसे भी भली-भाँति स्मरण किया॥29॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! When Bhishmaji ordered to perform the ritual ceremony in this way, Dharmaraja Yudhishthir did the same and also remembered very well the good religion which Brihaspatiji, the god of gods, had preached for Mandhata. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥