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mahabharat 13.78.28: अतः हे कुन्तीपुत्र! तुम भी बृहस्पतिजी द्वारा दी गई इस सलाह का पालन करो और कौरव राज्य पर अधिकार प्राप्त करके श्रेष्ठ ब्राह्मण को प्रसन्नतापूर्वक पवित्र गौओं का दान करो।   |   mahabharat अध्याय 13.78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 78: गोदानकी विधि, गौओंसे प्रार्थना, गौओंके निष्क्रय और गोदान करनेवाले नरेशोंके नाम  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.78.28 
तस्मात् पार्थ त्वमपीमां मयोक्तां
बार्हस्पतीं भारतीं धारयस्व।
द्विजाग्रॺेभ्य: सम्प्रयच्छस्व प्रीतो
गा: पुण्या वै प्राप्य राज्यं कुरूणाम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे कुन्तीपुत्र! तुम भी बृहस्पतिजी द्वारा दी गई इस सलाह का पालन करो और कौरव राज्य पर अधिकार प्राप्त करके श्रेष्ठ ब्राह्मण को प्रसन्नतापूर्वक पवित्र गौओं का दान करो।
 
Therefore, O son of Kunti, you should also follow this advice given by Brihaspatiji and after gaining control over the Kaurava kingdom, happily donate the sacred cows to the best Brahmin. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)