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mahabharat 13.77.8: भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! जो मनुष्य शास्त्रविधि के अनुसार व्रत आरम्भ करके उसे पूर्णतः पूरा करते हैं, वे सनातन लोकों को प्राप्त होते हैं॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.77.8 
भीष्म उवाच
यो व्रतं वै यथोद्दिष्टं तथा सम्प्रतिपद्यते।
अखण्डं सम्यगारभ्य तस्य लोका: सनातना:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! जो मनुष्य शास्त्रविधि के अनुसार व्रत आरम्भ करके उसे पूर्णतः पूरा करते हैं, वे सनातन लोकों को प्राप्त होते हैं॥8॥
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! Those people who start a fast as per the scriptures and complete it completely, they attain the eternal worlds. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)