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mahabharat 13.77.5: जो वीर पुरुष अपने कर्तव्य पालन में तत्पर रहते हैं, उन्हें क्या फल मिलता है? शौच और ब्रह्मचर्य के पालन का क्या फल कहा गया है?   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.77.5 
स्वकर्मनिरतानां च शूराणां चापि किं फलम्।
शौचे च किं फलं प्रोक्तं ब्रह्मचर्ये च किं फलम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो वीर पुरुष अपने कर्तव्य पालन में तत्पर रहते हैं, उन्हें क्या फल मिलता है? शौच और ब्रह्मचर्य के पालन का क्या फल कहा गया है?
 
What reward do the brave men who remain alert in performing their duty get? What is said to be the result of cleanliness and observance of celibacy? 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)