श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.77.36 
बह्वॺ: कोट्यस्त्वृषीणां तु ब्रह्मलोके वसन्त्युत।
सत्ये रतानां सततं दान्तानामूर्ध्वरेतसाम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मलोक में करोड़ों ऋषि रहते हैं जो सत्यवादी, संयमी और ब्रह्मचारी हैं ॥36॥
 
In Brahmloka live millions of Rishis who are truthful, self-controlled and celibate in this world. ॥36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)