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mahabharat 13.77.31: देवता, पितर और ब्राह्मण सत्य से ही प्रसन्न होते हैं। सत्य को परम धर्म बताया गया है; अतः सत्य का कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.77.31 
सत्येन देवा: प्रीयन्ते पितरो ब्राह्मणास्तथा।
सत्यमाहु: परो धर्मस्तस्मात् सत्यं न लङ्घयेत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
देवता, पितर और ब्राह्मण सत्य से ही प्रसन्न होते हैं। सत्य को परम धर्म बताया गया है; अतः सत्य का कभी उल्लंघन नहीं करना चाहिए॥31॥
 
Gods, ancestors and Brahmins are pleased only by truth. Truth has been declared as the ultimate religion; hence truth should never be violated.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)