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mahabharat 13.77.27: कुछ लोग वन में रहते हैं, कुछ घर में रहते हैं और कुछ अतिथि सेवा में पराक्रमी होते हैं। वे सभी अपने कर्मों के फल से अर्जित उत्तम लोकों को जाते हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.77.27 
अरण्ये गृहवासे च शूराश्चातिथिपूजने।
सर्वे यान्ति पराँल्लोकान् स्वकर्मफलनिर्जितान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग वन में रहते हैं, कुछ घर में रहते हैं और कुछ अतिथि सेवा में पराक्रमी होते हैं। वे सभी अपने कर्मों के फल से अर्जित उत्तम लोकों को जाते हैं॥ 27॥
 
Some people live in the forest, some live at home and some are valiant in serving guests. All of them go to the best worlds earned by the fruits of their actions.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)