श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  13.77.25-26 
आर्जवे च तथा शूरा: शमे वर्तन्ति मानवा:।
तैस्तैश्च नियमै: शूरा बहव: सन्ति चापरे।
वेदाध्ययनशूराश्च शूराश्चाध्यापने रता:॥ २५॥
गुरुशुश्रूषया शूरा: पितृशुश्रूषयापरे।
मातृशुश्रूषया शूरा भैक्ष्यशूरास्तथापरे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग सरलता दिखाने में ही वीर होते हैं। बहुत से लोग केवल अपने मन को वश में रखने में ही वीरता दिखाते हैं। बहुत से वीर लोग अनेक नियमों के द्वारा अपनी वीरता दिखाते हैं। बहुत से लोग वेदों का अध्ययन करने, अध्यापन करने, गुरु की सेवा करने, पिता की सेवा करने, माता की सेवा करने तथा भिक्षा मांगने में भी वीर होते हैं॥ 25-26॥
 
Many people are brave in showing simplicity. Many show their bravery only in controlling their mind. There are many brave people who show their bravery through various rules. Many are brave in studying Vedas, teaching, serving their Guru, serving their father, serving their mother and begging.॥ 25-26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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