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mahabharat 13.77.21: कर्म में तत्पर वैश्य दान देकर महान पद प्राप्त करता है और कर्म में तत्पर शूद्र सेवा करके स्वर्ग को प्राप्त होता है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.77.21 
वैश्य: स्वकर्मनिरत: प्रदानाल्लभते महत्।
शूद्र: स्वकर्मनिरत: स्वर्गं शुश्रूषयार्च्छति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कर्म में तत्पर वैश्य दान देकर महान पद प्राप्त करता है और कर्म में तत्पर शूद्र सेवा करके स्वर्ग को प्राप्त होता है ॥21॥
 
A Vaishya engaged in his work attains great status by giving donations. A Shudra who remains active in his work goes to heaven by doing service. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)