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mahabharat 13.77.19-20h: जो वेदों का अध्ययन करता है, धर्मात्मा शिष्यों को ज्ञान प्रदान करता है तथा अपने गुरु के कार्यों का गुणगान करता है, वह भी स्वर्ग में स्थान प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.77.19-20h 
अधीत्यापि हि यो वेदान् न्यायविद्‍भ्य: प्रयच्छति॥ १९॥
गुरुकर्मप्रशंसी तु सोऽपि स्वर्गे महीयते।
 
 
अनुवाद
जो वेदों का अध्ययन करता है, धर्मात्मा शिष्यों को ज्ञान प्रदान करता है तथा अपने गुरु के कार्यों का गुणगान करता है, वह भी स्वर्ग में स्थान प्राप्त करता है।
 
He who studies the Vedas and imparts knowledge to just disciples and praises the deeds of his Guru, also attains a place in heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)