Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.77.18-19h: नरेन्द्र! जो गुरु अपने शिष्यों को वेद पढ़ाता है, वह कष्ट सहकर अनन्त फल प्राप्त करता है। अग्नि में हवन करके ब्राह्मण ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित होता है। 18 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेन्द्र! जो गुरु अपने शिष्यों को वेद पढ़ाता है, वह कष्ट सहकर अनन्त फल प्राप्त करता है। अग्नि में हवन करके ब्राह्मण ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित होता है। 18 1/2॥
Narendra! The teacher who teaches Vedas to his disciples gets eternal rewards because of enduring hardships. By performing ritual sacrifice in fire, a Brahmin gets established in Brahmalok. 18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥