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mahabharat 13.77.12: वे जहाँ चाहें जाते हैं और जो चाहें प्राप्त करते हैं। वे अपने समस्त शत्रुओं का नाश करते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.77.12 
यत्रेच्छागामिनो दान्ता: सर्वशत्रुनिषूदना:।
प्रार्थयन्ति च यद् दान्ता लभन्ते तन्न संशय:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे जहाँ चाहें जाते हैं और जो चाहें प्राप्त करते हैं। वे अपने समस्त शत्रुओं का नाश करते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है ॥12॥
 
They go wherever they want and whatever they desire they get it. They destroy all their enemies. There is no doubt about this. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)