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mahabharat 13.77.1: युधिष्ठिर बोले- प्रभु! आपने धर्म का उपदेश देकर मुझे उसमें दृढ़ विश्वास दिलाया है। पितामह! अब मैं आपसे एक और शंका पूछ रहा हूँ, कृपया उसे भी बताइए।॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 77: व्रत, नियम, दम, सत्य, ब्रह्मचर्य, माता-पिता, गुरु आदिकी सेवाकी महत्ता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.77.1 
युधिष्ठिर उवाच
विस्रम्भितोऽहं भवता धर्मान् प्रवदता विभो।
प्रवक्ष्यामि तु संदेहं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले- प्रभु! आपने धर्म का उपदेश देकर मुझे उसमें दृढ़ विश्वास दिलाया है। पितामह! अब मैं आपसे एक और शंका पूछ रहा हूँ, कृपया उसे भी बताइए।॥1॥
 
Yudhishthira said-Prabhu! By preaching Dharma, you have given me a firm belief in it. Grandfather! Now I am asking you another doubt, please tell me about it.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)