श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.76.8 
गोप्रदानात् तारयते सप्त पूर्वांस्तथा परान्।
सुवर्णं दक्षिणां कृत्वा तावद्‍‍द्विगुणमुच्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
गौदान करने से मनुष्य अपने पूर्व के सात पूर्वजों तथा आगामी सात पीढ़ियों की संतानों को मुक्ति प्रदान करता है; तथापि यदि गौदान के साथ दक्षिणा भी दी जाए तो उस दान का फल दोगुना हो जाता है।
 
By donating a cow, a man liberates his forefathers of the previous seven generations and his children of the next seven generations; however, if gold is also given as dakshina (gift) along with it, then the fruit of that donation is said to be double.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)