Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.76.5: हे प्रभु! जो मनुष्य ब्राह्मण का यज्ञ नष्ट करता है, वही पाप दूसरे की गाय चुराने और बेचने से भी लगता है। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 13.76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये दोषा यादृशाश्चैव द्विजयज्ञोपघातके।
विक्रये चापहारे च ते दोषा वै स्मृता: प्रभो॥ ५॥
अनुवाद
हे प्रभु! जो मनुष्य ब्राह्मण का यज्ञ नष्ट करता है, वही पाप दूसरे की गाय चुराने और बेचने से भी लगता है। ॥5॥
O Lord! Whatever sins are committed by a person who destroys a Brahmin's sacrifice, the same faults are ascribed to stealing and selling another's cow. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥