श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.76.4 
घातक: खादको वापि तथा यश्चानुमन्यते।
यावन्ति तस्या रोमाणि तावद् वर्षाणि मज्जति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग गाय को मारते हैं, उसका मांस खाते हैं और गोहत्या का समर्थन करते हैं, वे गाय के शरीर पर जितने बाल होते हैं, उतने वर्षों तक नरक में डूबे रहते हैं ॥4॥
 
Those who kill a cow, eat its meat, and approve of cow slaughter, remain immersed in hell for as many years as the number of hairs on the body of a cow. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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