Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.76.3: जो दुष्ट मनुष्य गौमांस बेचने के लिए गौहत्या करता है अथवा गौमांस खाता है, तथा जो अपने स्वार्थवश किसी हत्यारे को गौहत्या करने की सलाह देता है, वे सब महापाप के भागी होते हैं ॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विक्रयार्थं हि यो हिंस्याद् भक्षयेद् वा निरंकुश:।
घातयानं हि पुरुषं येऽनुमन्येयुरर्थिन:॥ ३॥
अनुवाद
जो दुष्ट मनुष्य गौमांस बेचने के लिए गौहत्या करता है अथवा गौमांस खाता है, तथा जो अपने स्वार्थवश किसी हत्यारे को गौहत्या करने की सलाह देता है, वे सब महापाप के भागी होते हैं ॥3॥
The unruly person who kills a cow for the sake of selling its meat or eats beef, and who, for his own selfish reasons, advises a murderous person to kill a cow, are all guilty of a great sin. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥