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mahabharat 13.76.2: ब्रह्माजी बोले, 'इन्द्र! जो लोग दूसरों की गाय चुराकर खाते हैं, बेचते हैं या ब्राह्मणों को दान देते हैं, उनके फल के विषय में सुनो।   |   mahabharat अध्याय 13.76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.76.2 
पितामह उवाच
भक्षार्थं विक्रयार्थं वा येऽपहारं हि कुर्वते।
दानार्थं ब्राह्मणार्थाय तत्रेदं श्रूयतां फलम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले, 'इन्द्र! जो लोग दूसरों की गाय चुराकर खाते हैं, बेचते हैं या ब्राह्मणों को दान देते हैं, उनके फल के विषय में सुनो।
 
Brahma said, 'Indra! Listen to the reward of those who steal another's cow to eat, sell or donate to Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)