श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.76.10 
कुलानां पावनं प्राहुर्जातरूपं शतक्रतो।
एषा मे दक्षिणा प्रोक्ता समासेन महाद्युते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली शतक्रतो! कहा जाता है कि सोना समस्त कुलों को पवित्र करता है। इस प्रकार मैंने आपसे दक्षिणा के विषय में संक्षेप में कहा है॥10॥
 
O mighty Shatakrato! Gold is said to purify all families. In this way I have told you briefly about Dakshina.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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