श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 76: दूसरोंकी गायको चुराकर देने या बेचनेसे दोष, गोहत्याके भयंकर परिणाम तथा गोदान एवं सुवर्ण-दक्षिणाका माहात्म्य  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.76.1 
इन्द्र उवाच
जानन् यो गामपहरेद् विक्रीयाच्चार्थकारणात्।
एतद् विज्ञातुमिच्छामि क्व नु तस्य गतिर्भवेत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने पूछा - "पितामह! यदि कोई जानबूझकर धन के लोभ से किसी दूसरे की गाय का अपहरण करके उसे बेच दे, तो परलोक में उसका क्या होता है? मैं यह जानना चाहता हूँ।"
 
Indra asked - Grandfather! If someone intentionally kidnaps another's cow and sells it for the greed of money, what happens to him in the next world? I want to know this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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