Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.75.6-7: वहाँ किसी को किंचितमात्र भी विपत्ति नहीं आती । उस लोक में न तो रोग है और न शोक । इन्द्र ! वहाँ की गौएँ मन में जो कुछ चाहती हैं, वही उन्हें प्राप्त हो जाता है, यह मैंने अपनी आँखों से देखा है । वे जहाँ जाना चाहती हैं, वहाँ जाती हैं; जिस मार्ग से चाहती हैं, उसी मार्ग पर चलती हैं और केवल विचार मात्र से ही समस्त सुखों को प्राप्त करके उनका भोग करती हैं ॥6-7॥ | mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ किसी को किंचितमात्र भी विपत्ति नहीं आती । उस लोक में न तो रोग है और न शोक । इन्द्र ! वहाँ की गौएँ मन में जो कुछ चाहती हैं, वही उन्हें प्राप्त हो जाता है, यह मैंने अपनी आँखों से देखा है । वे जहाँ जाना चाहती हैं, वहाँ जाती हैं; जिस मार्ग से चाहती हैं, उसी मार्ग पर चलती हैं और केवल विचार मात्र से ही समस्त सुखों को प्राप्त करके उनका भोग करती हैं ॥6-7॥
No one faces even the slightest misfortune there. There is neither disease nor sorrow in that world. Indra! Whatever the cows there desire in their mind, they get it, this is a thing I have seen with my own eyes. They go wherever they want to go; they walk the way they want and by mere thought they obtain all the pleasures and enjoy them. ॥ 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥