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श्लोक 13.75.48  |
लोकान् बहुविधान् दिव्यान् यच्चास्य हृदि वर्तते।
तत् सर्वं समवाप्नोति कर्मणैतेन मानव:॥ ४८॥ |
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| अनुवाद |
| उपर्युक्त शुभ कर्मों के प्रभाव से मनुष्य नाना प्रकार के दिव्य लोकों को तथा अपने हृदय में जो कुछ चाहता है, उसे प्राप्त कर सकता है ॥48॥ |
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| A man can attain various kinds of divine worlds and all that he desires in his heart through the effect of the above-mentioned good deeds. ॥ 48॥ |
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