श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  13.75.48 
लोकान् बहुविधान् दिव्यान् यच्चास्य हृदि वर्तते।
तत् सर्वं समवाप्नोति कर्मणैतेन मानव:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त शुभ कर्मों के प्रभाव से मनुष्य नाना प्रकार के दिव्य लोकों को तथा अपने हृदय में जो कुछ चाहता है, उसे प्राप्त कर सकता है ॥48॥
 
A man can attain various kinds of divine worlds and all that he desires in his heart through the effect of the above-mentioned good deeds. ॥ 48॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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