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श्लोक 13.75.47  |
अश्वमेधक्रतोस्तुल्यं फलं भवति शाश्वतम्।
मृत्युकाले सहस्राक्ष यां वृत्तिमनुकाङ्क्षते॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| सहस्राक्ष! उसे अश्वमेध यज्ञ के समान अक्षय फल प्राप्त होता है। वह मृत्यु के समय इच्छित गति को भी प्राप्त करता है ॥47॥ |
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| Sahasraksha! He gets the inexhaustible fruits like those of Ashwamedha Yagna. He also attains the state he desires at the time of death. ॥ 47॥ |
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