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mahabharat 13.75.40: जिस ब्राह्मण की जीविका क्षीण हो गई हो और जो अत्यन्त दुःख भोग रहा हो, उसे सामान्य काल और स्थान में भी दूध देने वाली गाय का दान करना चाहिए। इसके अतिरिक्त खेती के लिए, तर्पण के लिए, प्रसूता स्त्री के पोषण के लिए, गुरुदक्षिणा के लिए अथवा बालकों के पालन-पोषण के लिए भी सामान्य काल और स्थान में भी दूध देने वाली गाय का दान करना उचित है। ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.75.40 
वृत्तिग्लाने सीदति चातिमात्रं
कृष्यर्थे वा होम्यहेतो: प्रसूते:।
गुर्वर्थं वा बालसंवृद्धये वा
धेनुं दद्याद् देशकालेऽविशिष्टे॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जिस ब्राह्मण की जीविका क्षीण हो गई हो और जो अत्यन्त दुःख भोग रहा हो, उसे सामान्य काल और स्थान में भी दूध देने वाली गाय का दान करना चाहिए। इसके अतिरिक्त खेती के लिए, तर्पण के लिए, प्रसूता स्त्री के पोषण के लिए, गुरुदक्षिणा के लिए अथवा बालकों के पालन-पोषण के लिए भी सामान्य काल और स्थान में भी दूध देने वाली गाय का दान करना उचित है। ॥40॥
 
A Brahmin whose livelihood has become meagre and who is suffering a lot should donate a milk-giving cow even in normal times and places. Apart from this, it is also appropriate to donate a milk-giving cow for farming, for offerings, for nourishing a woman who has just given birth, for Gurudakshina or for raising children even in normal times and places. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)