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mahabharat 13.75.39: जो ब्राह्मण वेदों में पारंगत है, शुद्ध कुल में उत्पन्न हुआ है, शान्त स्वभाव वाला है, यज्ञ में तत्पर है, पापों से निर्भय है और ज्ञानी है, गौओं के प्रति क्षमाशील है, जिसका स्वभाव बहुत तीखा नहीं है, जो गौओं की रक्षा करने में समर्थ है और दुष्टात्माओं से रहित है, ऐसा ब्राह्मण गोदान के लिए उत्तम कहा गया है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.75.39 
स्वाध्यायाढॺं शुद्धयोनिं प्रशान्तं
वैतानस्थं पापभीरुं बहुज्ञम्।
गोषु क्षान्तं नातितीक्ष्णं शरण्यं
वृत्तिग्लानं तादृशं पात्रमाहु:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण वेदों में पारंगत है, शुद्ध कुल में उत्पन्न हुआ है, शान्त स्वभाव वाला है, यज्ञ में तत्पर है, पापों से निर्भय है और ज्ञानी है, गौओं के प्रति क्षमाशील है, जिसका स्वभाव बहुत तीखा नहीं है, जो गौओं की रक्षा करने में समर्थ है और दुष्टात्माओं से रहित है, ऐसा ब्राह्मण गोदान के लिए उत्तम कहा गया है ॥39॥
 
A Brahmin who is well-versed in the Vedas, is born in a pure family, has a peaceful nature, is devoted to sacrifices, is fearless of sins and is knowledgeable, who is forgiving towards cows, whose nature is not very sharp, who is capable of protecting cows and is free from evil spirits, such a Brahmin has been said to be the best candidate for Godan. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)