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mahabharat 13.75.38: केवल गौदान करना ही श्रेयस्कर नहीं है; उसके लिए श्रेष्ठ पुरुष, उत्तम समय, विशिष्ट गौ, विधि और समय का ज्ञान आवश्यक है। हे ब्राह्मण! अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी पुरुष और गौओं के पारस्परिक सम्बन्ध को जानना अत्यन्त कठिन है।   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.75.38 
न त्वेवासां दानमात्रं प्रशस्तं
पात्रं कालो गोविशेषो विधिश्च।
कालज्ञानं विप्र गवान्तरं हि
दु:खं ज्ञातुं पावकादित्यभूतम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
केवल गौदान करना ही श्रेयस्कर नहीं है; उसके लिए श्रेष्ठ पुरुष, उत्तम समय, विशिष्ट गौ, विधि और समय का ज्ञान आवश्यक है। हे ब्राह्मण! अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी पुरुष और गौओं के पारस्परिक सम्बन्ध को जानना अत्यन्त कठिन है।
 
Merely donating cows is not praiseworthy; for that, knowledge of the best person, the best time, the special cow, the method and the time is necessary. O Brahmin! It is very difficult to know the mutual relationship between cows and the person who is as radiant as the fire and the sun. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)