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mahabharat 13.75.37: जो मनुष्य अनुशासित है और गौओं के अभाव में तिल का दान करता है, वह उस गौ की सहायता से कठिन से कठिन समस्या को पार कर लेता है और दूध से बहने वाली नदी के तट पर आनंदपूर्वक निवास करता है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.75.37 
अभावे यो गवां दद्यात् तिलधेनुं यतव्रत:।
दुर्गात् स तारितो धेन्वा क्षीरनद्यां प्रमोदते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अनुशासित है और गौओं के अभाव में तिल का दान करता है, वह उस गौ की सहायता से कठिन से कठिन समस्या को पार कर लेता है और दूध से बहने वाली नदी के तट पर आनंदपूर्वक निवास करता है ॥37॥
 
A man who is disciplined and who donates a sesame seed in the absence of cows, with the help of that cow, overcomes a difficult problem and enjoys living on the banks of a river flowing with milk. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)