Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.75.32-33h: हे शतक्रतो! जो मनुष्य अगले भोजन से बचे हुए अन्न से एक गाय खरीदकर दान करता है, उसे उस गाय पर जितने बाल होते हैं, उतनी गायों का दान करने का अनन्त फल मिलता है। | mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकेनैव च भक्तेन य: क्रीत्वा गां प्रयच्छति।
यावन्ति तस्या रोमाणि सम्भवन्ति शतक्रतो॥ ३२॥
तावत् प्रदानात् स गवां फलमाप्नोति शाश्वतम्।
अनुवाद
हे शतक्रतो! जो मनुष्य अगले भोजन से बचे हुए अन्न से एक गाय खरीदकर दान करता है, उसे उस गाय पर जितने बाल होते हैं, उतनी गायों का दान करने का अनन्त फल मिलता है।
O Shatakrato! One who buys a cow with the food saved from the next meal and donates it, gets the eternal reward of donating as many cows as the number of hairs on that cow. 32 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥