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mahabharat 13.75.26-27h: जो मनुष्य सदैव सावधान रहकर उपर्युक्त धर्म का पालन करता है और जो सत्यवादी, गुरुभक्त, कार्यकुशल, क्षमाशील, ईश्वरभक्त, शान्त, धर्मात्मा, ज्ञानी, धार्मिक और अहंकाररहित है, वह यदि उपर्युक्त रीति से ब्राह्मण को दूध देने वाली गाय दान करता है, तो उसे महान फल की प्राप्ति होती है ॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  13.75.26-27h 
एतच्चैनं योऽनुतिष्ठेत युक्त:
सत्ये रतो गुरुशुश्रूषया च।
दक्ष: क्षान्तो देवतार्थी प्रशान्त:
शुचिर्बुद्धो धर्मशीलोऽनहंवाक्॥ २६॥
महत् फलं प्राप्यते स द्विजाय
दत्त्वा दोग्ध्रीं विधिनानेन धेनुम्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सदैव सावधान रहकर उपर्युक्त धर्म का पालन करता है और जो सत्यवादी, गुरुभक्त, कार्यकुशल, क्षमाशील, ईश्वरभक्त, शान्त, धर्मात्मा, ज्ञानी, धार्मिक और अहंकाररहित है, वह यदि उपर्युक्त रीति से ब्राह्मण को दूध देने वाली गाय दान करता है, तो उसे महान फल की प्राप्ति होती है ॥26 1/2॥
 
The person who always follows the above mentioned religion by being careful and who is truthful, devoted to serving his Guru, skilled, forgiving, devotee of God, peaceful, pious, knowledgeable, religious and devoid of ego, if he donates a milk-giving cow to a Brahmin in the above mentioned manner, then he gets great rewards. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)