Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.75.21: जो जन्म से ही सत्य बोलता है, अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, गुरुजनों और ब्राह्मणों के कटु वचनों को सहन करता है और क्षमाशील है, उसकी चाल गाय के समान होती है। अर्थात् वह गोलोक को जाता है। 21॥ | mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जन्मप्रभृति सत्यं च यो ब्रूयान्नियतेन्द्रिय:।
गुरुद्विजसह: क्षान्तस्तस्य गोभि: समा गति:॥ २१॥
अनुवाद
जो जन्म से ही सत्य बोलता है, अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, गुरुजनों और ब्राह्मणों के कटु वचनों को सहन करता है और क्षमाशील है, उसकी चाल गाय के समान होती है। अर्थात् वह गोलोक को जाता है। 21॥
One who always speaks the truth since birth, controls his senses, tolerates harsh words from his teachers and brahmins and is forgiving, his gait is like that of a cow. That means he goes to Goloka. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥