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mahabharat 13.75.19: जो मनुष्य अपनी पैतृक सम्पत्ति से उचित रीति से प्राप्त गौओं का दान करता है, वे गौएँ अनन्त फल देने वाली हो जाती हैं ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.75.19 
दायाद्याद् या: स्म वै गावो न्यायपूर्वैरुपार्जिता:।
प्रदद्यात् ता: प्रदातॄणां सम्भवन्त्यपि च ध्रुवा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी पैतृक सम्पत्ति से उचित रीति से प्राप्त गौओं का दान करता है, वे गौएँ अनन्त फल देने वाली हो जाती हैं ॥19॥
 
To one who donates cows acquired through fair means from his ancestral property, those cows become the givers of everlasting fruit. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)