Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.75.14-15: व्यभिचारी, गुरु-हत्यारा, झूठा, सदा चुगलखोर, ब्राह्मणों से द्वेष रखने वाला, मित्र से द्वेष रखने वाला, ठग, कृतघ्न, झूठा, कुटिल, धर्म से द्वेष रखने वाला और ब्रह्म-हत्यारा - इन सब दुर्गुणों से युक्त दुष्ट मनुष्य मन में भी कभी गोलोक को प्राप्त नहीं कर सकता; क्योंकि वहाँ पुण्यात्माएँ निवास करती हैं ॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न पारदारी पश्यति लोकमेतं
न वै गुरुघ्नो न मृषा सम्प्रलापी।
सदा प्रवादी ब्राह्मणेष्वात्तवैरो
दोषैरेतैर्यश्च युक्तो दुरात्मा॥ १४॥
न मित्रध्रुङ्नैकृतिक: कृतघ्न:
शठोऽनृजुर्धर्मविद्वेषकश्च।
न ब्रह्महा मनसापि प्रपश्येद्
गवां लोकं पुण्यकृतां निवासम्॥ १५॥
अनुवाद
व्यभिचारी, गुरु-हत्यारा, झूठा, सदा चुगलखोर, ब्राह्मणों से द्वेष रखने वाला, मित्र से द्वेष रखने वाला, ठग, कृतघ्न, झूठा, कुटिल, धर्म से द्वेष रखने वाला और ब्रह्म-हत्यारा - इन सब दुर्गुणों से युक्त दुष्ट मनुष्य मन में भी कभी गोलोक को प्राप्त नहीं कर सकता; क्योंकि वहाँ पुण्यात्माएँ निवास करती हैं ॥14-15॥
An adulterer, a Guru-killer, a liar, always a gossiper, one who has enmity with Brahmins, a traitor to his friend, a swindler, an ungrateful person, a liar, a crooked, a hater of religion and a Brahma-killer - a wicked man with all these vices can never attain Goloka even in his mind; Because virtuous souls reside there. 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥