Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.75.11-13: जो मनुष्य सब प्रकार के मांस का त्याग कर देता है, सदैव भगवान के ध्यान में लगा रहता है, धार्मिक है, माता-पिता की पूजा करता है, सत्य बोलता है, ब्राह्मणों की सेवा में लगा रहता है, कभी किसी की निंदा नहीं करता, गायों और ब्राह्मणों पर क्रोध नहीं करता, धर्म में रत रहता है और अपने गुरुजनों की सेवा करता है, आजीवन सत्य बोलने का व्रत लेता है, दान देने में प्रवृत्त होता है और यदि कोई अपराध भी करता है तो उसे क्षमा कर देता है, सौम्य स्वभाव का होता है, अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, देवताओं की पूजा करता है, सबका आतिथ्य करता है और दयालु होता है, ऐसे गुणों वाला मनुष्य सनातन और अविनाशी गोलोक को जाता है। | mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य सब प्रकार के मांस का त्याग कर देता है, सदैव भगवान के ध्यान में लगा रहता है, धार्मिक है, माता-पिता की पूजा करता है, सत्य बोलता है, ब्राह्मणों की सेवा में लगा रहता है, कभी किसी की निंदा नहीं करता, गायों और ब्राह्मणों पर क्रोध नहीं करता, धर्म में रत रहता है और अपने गुरुजनों की सेवा करता है, आजीवन सत्य बोलने का व्रत लेता है, दान देने में प्रवृत्त होता है और यदि कोई अपराध भी करता है तो उसे क्षमा कर देता है, सौम्य स्वभाव का होता है, अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, देवताओं की पूजा करता है, सबका आतिथ्य करता है और दयालु होता है, ऐसे गुणों वाला मनुष्य सनातन और अविनाशी गोलोक को जाता है।
One who gives up eating all kinds of meat, is always engaged in the meditation of the Lord, is religious, worships his parents, speaks the truth, remains engaged in the service of Brahmins, never slanders, never gets angry at cows and Brahmins, remains devoted to religion and serves his teachers, takes a lifelong vow to be truthful, is inclined to charity and forgives anyone even if he commits a crime, is of mild nature, has controlled his senses, worships the gods, is hospitable to all and is kind, a man with such qualities goes to the eternal and imperishable Goloka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥