Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.75.10: इन्द्र! जो सब कुछ सहन कर लेते हैं, क्षमाशील, दयालु, गुरुजनों की आज्ञा मानने वाले और अहंकाररहित होते हैं, वे ही श्रेष्ठ मनुष्य उस लोक में जाते हैं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.75.10 
तत्र सर्वसहा: क्षान्ता वत्सला गुरुवर्तिन:।
अहंकारैर्विरहिता यान्ति शक्र नरोत्तमा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र! जो सब कुछ सहन कर लेते हैं, क्षमाशील, दयालु, गुरुजनों की आज्ञा मानने वाले और अहंकाररहित होते हैं, वे ही श्रेष्ठ मनुष्य उस लोक में जाते हैं॥10॥
 
Indra! Only the best people, who tolerate everything, are forgiving, kind, obey their teachers and are egoless, go to that world. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)