श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 75: ब्रह्माजीका इन्द्रसे गोलोक और गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.75.1 
पितामह उवाच
योऽयं प्रश्नस्त्वया पृष्टो गोप्रदानादिकारित:।
नास्ति प्रष्टास्ति लोकेऽस्मिंस्त्वत्तोऽन्यो हि शतक्रतो॥ १॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा, "देवेन्द्र! तुमने गौओं के दान के सम्बन्ध में जो प्रश्न किया है, वैसा प्रश्न इस संसार में तुम्हारे अतिरिक्त किसी और ने नहीं किया है ॥1॥
 
Brahma said, "Devendra! The question you have raised regarding the donation of cows, no one else in this world apart from you has asked such a question. ॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd